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आज भगवान जगन्नाथ की देव स्नान यात्रा, 108 कलशों के पवित्र जल से होगा महाभिषेक, हाथी वेश में देंगे दर्शन

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Jun 29, 2026 11:32 am IST,  Updated : Jun 29, 2026 12:24 pm IST

भगवान श्रीजगन्नाथ की प्रसिद्ध देव स्नान यात्रा में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी भगवान जगन्नाथ को 35 कलश, भगवान बलभद्र को 33 कलश, देवी सुभद्रा को 22 कलश और भगवान सुदर्शन को 18 कलश पवित्र जल अर्पित किया जाएगा।

Jagannath Dev Snan Yatra - India TV Hindi
भगवान जगन्नाथ की देव स्नान यात्रा Image Source : REPORTER INPUT

भगवान श्रीजगन्नाथ की प्रसिद्ध देव स्नान यात्रा को लेकर आज श्रीक्षेत्र पुरी पूरी तरह भक्तिमय माहौल में डूबा हुआ है। महाप्रभु की स्नान यात्रा के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए श्रीमंदिर प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था और सभी धार्मिक अनुष्ठानों को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।

108 कलशों से किया जाएगा महाभिषेक 

परंपरा के अनुसार सबसे पहले गजपति महाराज छेरा पहंरा की रस्म निभाएंगे। इसके बाद भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान सुदर्शन का 108 कलशों के सुगंधित और पवित्र जल से महाभिषेक किया जाएगा। निर्धारित नीतियों के अनुसार दोपहर 12 बजे से 2 बजे के बीच  स्नान की रस्म पूरी होगी। इसके बाद शाम 4 बजे से 5 बजे के बीच भगवानों का प्रसिद्ध हाथी वेश यानी गजानन वेश किया जाएगा। वहीं शाम 7:30 बजे से रात 9:30 बजे तक श्रद्धालुओं को  दर्शन का अवसर मिलेगा। इसके बाद रात 11 बजे से रात 2 बजे तक बाहुड़ा पहंडी की रस्म संपन्न होगी।

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी  भगवान जगन्नाथ को 35 कलश, भगवान बलभद्र को 33 कलश, देवी सुभद्रा को 22 कलश और भगवान सुदर्शन को 18 कलश पवित्र जल अर्पित किया जाएगा। यानी कुल 108 कलशों के जल से चारों विग्रहों का महा स्नान कराया जाएगा।

मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों के लिए मानव जीवन की तरह अनेक लीलाएं करते हैं। जैसे सामान्य लोग जन्मदिन मनाते हैं, गर्मी में स्नान करते हैं, बीमार होने पर विश्राम करते हैं और यात्रा पर जाते हैं, उसी तरह भगवान भी अपने भक्तों के बीच इन सभी मानवीय लीलाओं का प्रदर्शन करते हैं। इन्हीं लीलाओं के कारण वर्षभर भगवान की विभिन्न यात्राएं आयोजित होती हैं। 

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर आयोजित होती है स्नान यात्रा

ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि पर आयोजित होने वाली देव स्नान यात्रा को भगवान जगन्नाथ का जन्मोत्सव भी माना जाता है। इस दिन षोडशोपचार पूजा पूरी होने के बाद भगवान का महा स्नान कराया जाता है। स्नान के बाद भगवान को गजानन यानी हाथी वेश धारण कराया जाता है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान जगन्नाथ के परम भक्त गणपति भट्ट की मनोकामना पूरी करने के लिए भगवान ने एक बार गजानन स्वरूप में दर्शन दिए थे। तभी से स्नान यात्रा के दिन भगवान को हाथी वेश पहनाने की परंपरा चली आ रही है। इस वेश में भगवान जगन्नाथ काले हाथी के स्वरूप में और भगवान बलभद्र सफेद हाथी के स्वरूप में सजाए जाते हैं। इस दिन भगवान के दर्शन को अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है।

(ओडिशा से शुभम कुमार की रिपोर्ट)

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